मनुष्य के अंदर का मनुष्य

ये कहानी मेरी जवानी
की रवानी की बुझती चिंगारी की है।

ये कहानी श्वेत जल की श्वेत मछलियाँ
कब श्वेत जल पी लेती हैं,
उसकी ज़िंदगानी की है।

ये कहानी काली लिबास में लिपटी,
काली होने पर कब काल के गाल में चली जाती है,
उस पर हैरानी की है।

ये कहानी शहर में शहर की तरह दिखने की कोशिश करने वाले शहरियों की है,
कि शहर उनके शहर को कब छीन लेता है,
उस पर हैरानी की है।

ये कहानी सफ़ेद कपड़े में सफ़ेद शरीर ढककर,
सफ़ेद दिखने की कोशिश करने वालों की कारस्तानी की है।